در تاقتاقییِ حوضخانه،
| تا سالها بعد | |
| آبی را |
مفهومی از وطن دهد.
| اميرزادهيی تنها | |
| با تکرارِ چشمهایِ بادامِ تلخاش | |
| در هزار آينهیِ ششگوشِ کاشی. |
لالایِ نجواوارِ فوارهيی خُرد
| که بر وقفهیِ خوابالودهیِ اطلسیها | |
| میگذشت |
تا سالها بعد
| آبی را | |||
| مفهومی | |||
| ناگاه | |||
| از وطن دهد. |
| اميرزادهيی تنها | |
| با تکرار چشمهایِ بادامِ تلخاش | |
| در هزار آينهیِ ششگوشِ کاشی. |
| روز | |
| بر نوکِ پنجه میگذشت |
| از نيزههایِ سوزانِ نقره | |
| به کجترين سايه، |
تا سالها بعد
| تکرّرِ آبی را | |
| عاشقانه |
| مفهومی از وطن دهد | |
| تاقتاقیهایِ قيلوله |
و نجوایِ خوابآلودهیِ فوارهيی مردّد
بر سکوتِ اطلسیهایِ تشنه،
و تکرارِ ناباورِ هزاران بادامِ تلخ
در هزار آينهیِ ششگوشِ کاشی
سالها بعد
| سالها بعد | ||
| به نيمروزی گرم | ||
| ناگاه |
خاطرهیِ دوردستِ حوضخانه.
| آه اميرزادهیِ کاشیها | |
| با اشکهایِ آبیات! |


